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ज्योतिष की मानें तो पंचक में कुछ विशेष कार्य नहीं किए जाते हैं। जब चंद्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं। प्राचीन ज्योतिष शास्त्र में धनिष्ठा से लेकर रेवती नक्षत्र यानी 5 नक्षत्रों का योग (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती) होता हैं, उन्हें ही पंचक काल कहा जाता है। अत: इन 5 दिनों में किसी भी तरह के शुभ कार्य तथा मांगलिक कार्यों को नहीं करना चाहिए। पंचक कब से कब तक : 09 जून 2023, शुक्रवार को 06.02 ए एम से शुरू, पंचक का अंत : 13 जून 2023, मंगलवार को 01.32 पी एम पर पंचक का समापन होगा। मान्यता के अनुसार 9 जून से शुरू होने वाले चोर पंचक में पैसों का लेनदेन करने की सख्त मनाई है, क्योंकि इससे आपको धन हानि का सामना करना पड़ सकता है। अत: ध्यान रखें कि 13 जून 2023 तक आप पैसा का बड़ा लेन-देन न करें। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। वेबदुनिया इसकी पुष्टि नहीं करता है। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। Rummy Nose Tetra, Deepak jalane ke fayde : हिन्दू धर्म में पूजाघर और मंदिर में दीपक जलाने की परंपरा है। इसी के साथ ही वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। हर जगह दीया जलाने के प्रभाव और लाभ भी अलग-अलग है। दीपक की बत्ती कैसी होना चाहिए और दीपक में घी डालें या तेल यह भी जानना जरूरी है ।आओ जानते हैं कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास या शिवजी के मंदिर में दीपक जलाने से क्या होता है। पीपल के पास दीपक प्रज्वलित करें : शनिवार या अमावस्या को पीपल के पेड़ के नीचे शाम के घी का दीपक जलाने से जहां श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती हैं, वहीं इससे आर्थिक तंगी दूर होगी। इसके साथ ही सरसो के तेल का दीपक जलाने से भगवान शनिदेव प्रसन्न होते हैं और इस कार्य से पितृरों को भी कृपा प्राप्त होती है। 41 दिनों तक लगातार दीपक जलाने से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। शिव मंदिर में प्रज्वलित करें दीपक : एक कथा के अनुसार ही शाम के समय शिव मंदिर में घी का दीपक लगाने वाले व्यक्ति को अपार धन-संपत्ति एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती हैं। अत: नियमित रूप से शाम को या रात्रि के समय किसी भी शिवलिंग के समक्ष दीपक लगाना चाहिए। यदि दीपक 8 या 12 मुखी है तो इससे शिव कृपा और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी समस्याओं का अंत होता है। दीपक लगाते समय 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करना चाहिए। मंदिर मेंर दीपक को भगवान की प्रतिमा के सामने रखें। यदि घी का दीपक हो तो बाएं साइड और तेल का हो तो दाईं ओर रखना चाहिए। घी के दीपक में रुई और तेल के दीपक में लाल बत्ती का उपयोग करना चाहिए।

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आए दिन शहरी सीमा में टाइगर के दिखने की खबरें सामने आ रही है। हाल ही में 30 लाख की आबादी वाले इंदौर जैसे बड़े शहर में टाइगर देखा गया था। करीब 20 से 25 दिनों बाद भी उसे रेस्‍क्‍यू नहीं किया जा सका है। मप्र की राजधानी भोपाल के कालियासोत में एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ दिखी है, जिसके बाद रहवासियों को मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के लिए मना किया गया है। भोपाल के पास और भी कई इलाकों में टाइगर शहरी सीमा और गांव-कस्‍बों के आसपास नजर आते रहे हैं। दरअसल, लगातार घटता हैबिटाट एरिया और बढ़ते शहरीकरण ने वन्‍यजीवों (Wild life) को शहरों की तरफ धकेलना शुरू कर दिया है। हालात यह है कि आए दिन शहरी सीमा में बाघ सीसीटीवी कैमरों में नजर आए हैं। हालांकि वन्‍य जीव खासतौर से टाइगर के शहरों में नजर आने के पीछे कई वजहें हैं। इनमें खारा होता पानी, शिकार की कमी, वन्‍य जीवों का बूढ़ा हो जाना और नर बाघ का मादा बाघ की तलाश में वन से बाहर निकलना। लेकिन इनमें सबसे बड़ी वजह शहरीकरण की वजह से वन्‍यक्षेत्र का लगातार घटना है। Kabaddi Tricks, दरअसल, NDRF के कई जवाना कई घंटों तक घटनास्‍थल पर मौजूद थे। आंकड़ें बताते हैं कि बचाव दल ने 44 से ज्‍यादा पीड़ितों और घायलों का रेस्‍क्‍यू कर उन्‍हें बचाया। जबकि हादसे वाले स्‍थान से 121 से ज्‍यादा शवों को निकालकर उन्‍हें तय जगह पर पहुंचाया।

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Jagannath Rath Yatra 2023: भारत के ओड़िसा राज्य के पुरी में भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा का प्रतिवर्ष आयोजन होता है। प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा कब, क्यों, कहां और कैसे निकाली जाती है यह देखने के लिए देश विदेश से हजारों भक्त आते हैं। हर कोई इस रथ यात्रा में भाग लेता है। आओ जानते हैं इस यात्रा की 10 खास बातें। 1. जगन्नाथ की रथ यात्रा कब निकाली जाती है? हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 20 जून 2023 को यह रथ यात्रा निकलेगी। 2. क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ यात्रा? इस रथयात्रा का उद्‌देश्य यह है कि वे लोग, जो समूचे वर्षभर मंदिर में प्रवेश नहीं पा सकते हैं, उन्हें भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो। राजा इन्द्रद्युम्न और उनकी पत्नी गुंडिचा देवी के काल में प्रभु जगन्नाथ की मूर्ति बनाने के लिए समुद्र से विशाल लाल वृक्ष का तना निकाला गया। विशालकाय तने को निकालकर उसे रथ के द्वारा उस स्थान पर लाया गया जहां पर श्री नीलमाधव की मूर्ति बनाई गई थी। मूर्तिकार की शर्त थी कि जब तक मूर्ति पूर्ण नहीं होती तब तक इसे कोई देखेगा नहीं अन्यथा मैं मूर्ति बनाना छोड़कर चला जाऊंगा। बनती हुए मूर्ति को रानी गुंडिचा द्वारा देखने के कारण मूर्ति अधूरी रह गई थी जिसके चलते रानी गुंडिचा नगर के बाहर गुफा में तपस्या करने चली गई। तप से प्रभावित होकर प्रतिवर्ष भगवान जगन्नाथ रानी गुंडिजा के मंदिर में रथ पर सवार होकर जाते हैं और वहां पर 10 दिनों तक विश्राम करके लौट आते हैं। 3. कैसे होता है रथों का निर्माण? Online Jhandi Munda, आषाढ़ माह में क्या करना चाहिए? देव पूजा : आषाढ़ माह में भगवान विष्णु, सूर्यदेव, मंगलदेव, दुर्गा और हनुमानजी की पूजा करने का दोगुना फल मिलता है। आषाढ़ मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है। इस माह में विष्णुजी के साथ ही जल देव की उपासना से धन की प्राप्ति सरल हो जाती है और मंगल एवं सूर्य की उपासना से ऊर्जा का स्तर बना रहता है। इसके अलावा देवी की उपासना भी शुभ फल देती है। दान : इस माह में आषाढ़ मास के पहले दिन खड़ाऊं, छाता, नमक तथा आंवले का दान किसी ब्राह्मण को किया जाता है। पहले दिन नहीं कर पाएं हैं तो अन्य विशेष दिनों में दान कर सकते हैं। यज्ञ : यह माह यज्ञ करने का माह कहा गया है। वर्ष के इसी मास में अधिकांश यज्ञ करने का प्रावधान शास्त्रों में बताया गया है। इस माह में यज्ञ करने से यज्ञ का फल तुरंत ही मिलता है। व्रत : आषाढ़ माह में विशेष दिनों में व्रत करने का बहुत ही महत्व होता है। क्योंकि आषाढ़ माह में देव सो जाते हैं, इसी माह में गुप्त नवरात्रि के व्रत प्रारंभ होते हैं और इसी माह से चातुर्मास भी प्रारंभ हो जाता है। इस माह में योगिनी एकादशी और देवशनी एकादशी का प्रमुख व्रत होता है। स्नान और सेहत : इस मास में सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस मास ही नहीं, अगले तीन माह तक सेहत का ध्यान रखना चाहिए। इस महीने में जल युक्त फल खाने चाहिए। आषाढ़ में बेल बिलकुल भी न खाएं। इस माह में स्नान करने का भी महत्व बढ़ जाता है। उपरोक्त सभी कार्य करने से इस महीने को कामना पूर्ति का महीना भी कहा जाता है। इस माह में जो भी कामना की जाती है उसकी पूर्ति हो जाती है।

Vastu tips fro shoe and slipper: पहले के जमाने में लोग अपने जूते चप्पल घर के बाहर उतारक ही घर में जाते थे। घर में सभी बगैर चप्पल के रहते थे। परंतु आजकल कई लोग घर में चप्पल पहनकर रहते हैं। कुछ लोग तो घर में ही ही बाहर के जूते पहनकर आ जाते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि वास्तु के अनुसार घर में चप्पल पहनना चाहिए या नहीं। घर में चप्पल पहनना चाहिए या नहीं? Texas Holdem Minimum Bet सिर्फ 41 साल की उम्र में डॉक्‍टर गौरव गांधी की मौत से चिकित्सक भी सदमे में हैं कि आखिर हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को कैसे रोका जाए? गौरव गांधी को जब हार्ट अटैक आया वे उस समय वह घर से अस्पताल के लिए निकल रहे थे। उसी समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और सीने में दर्द महसूस होने पर उन्‍होंने जी जी अस्पताल ले जाया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मौत की खबर के बाद जी जी अस्पताल के बाहर काफी संख्या में डॉक्टर जमा हो गए। जी जी अस्पताल की डीन नंदिनी देसाई भी मौके पर पहुंची। बाद में उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।